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किस्से पार्किंसंस के # १२ शोभना ताई

Updated: 6 days ago

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मुंबई में रहने वाले मेरे फुफरे भाई, अनिल कुणकेरकर का फ़ोन आया।  उनके साडू भाई को पीडी का निदान हुआ था।  अनिल भाई ने मुझसे कहा," सुना है तू पार्किंसंस ठीक कर देती है ? " मुझे कोई जवाब ही नहीं सुझा, क्योंकि उन लोगों से जो कहते है कि वे पार्किनसन्स ठीक कर सकते है , उनसे ही सावधान करने के लिए मैं पार्किंसंस के बारे में जागरूकता फैलाने के लिए अपनी कलम और आवाज़ का उपयोग कर रही हूँ और ये मुझसे पूछ रहे हैं कि " मैं पार्किंसंस ठीक कर सकती हूँ क्या"। क्या मेरा संघर्ष लोगों तक नहीं पहुँच रहा है, मेरा कोई उत्तर नहीं पा कर वहां से आवाज़ आयी " तुम सुन पा रही हो ना मुझे। "

 

" हाँ हाँ। " मैंने अपने विचारों से बाहर आते हुए कहा।   फिर आधे घंटे तक मैं समझाती रही कि पार्किंसंस ठीक होने वाली बिमारी नहीं है।  हाँ इसके लक्षणों पर ज़रूर नियंत्रण पाया जा सकता है।  वैगरह वैगरह ………… मैंने उनसे ये भी कहा कि मैं शेखर बर्वे द्वारा लिखित  " पार्किंसंसशी मैत्रीपूर्ण लढत " (पार्किंसंस से मित्रतापूर्ण लड़ाई ) भेज दूँगी।  इस से आपको पार्किंसंस के बारे बहुत जानकारी मिल जायेगी।  उसके बाद उनके साडू भाई दत्तात्रय मोर्डेकर और उनकी धर्मपत्नी से भी बात हुई।  उन्हें व्हाट्सप्प ग्रुप में भी शामिल कर लिया।  एक घंटे के भीतर मैं ये साबित करने में कामयाब हो गयी कि मेरे बारे में पार्किंसंस ठीक करने वाली अफवाह कितनी गलत है , तब जाकर मेरी सांस में सांस आयी।

 

  अनिल से बात होने पर मुझे एहसास हुआ कि ये अफवाह की जड़ बेलगाम में है।  इस से पहले बेलगाम से एक अफवाह  उडी थी कि, "गोपू तीर्थली का शराब पीना बढ़ गया है।  वो ठीक से बोल नहीं पाते और उनके हाथ भी कांपते है। " जो लोग हमें जानते थे उन्होंने ऐसा बोलने वालों को बहुत ही डांटा था।  तब हमने इसे मज़ाक में लिया था।  ये अफवाह ऐसे ही नहीं थी , इसे जड़ से उखाड़ना ज़रूरी था।  जो लोग मूल रूप से बेलगाम के रहने वाले थे , पार्किंसंस मित्र मंडल से जुड़ने पर उनकी सोच में  काफी सुधार हुआ था।  लगभग हर किसी में मित्र मंडल से जुड़ने के बाद , पार्किंसंस को स्वीकार कर उसके साथ खुश रहने की प्रक्रिया में बदलाव आया ।  आत्म विश्वास बढ़ा   इन्हीं तथ्यों को तोड़ मरोड़कर पेश किया गया होगा। 

 

इससे एक बात अच्छी हो गयी।  ये सब पार्किंसंस मित्र मंडल से जुड़ गए।  अनिल ने तो पांच हज़ार रुपये का चेक हमारे बैंक अकाउंट  में उसी वक़्त जमा कर दिया।  सिर्फ इतना ही नहीं, ९ अप्रैल के जागतिक पार्किंसंस दिवस  के उपलक्ष में आयोजित कार्यक्रम में ये सब लोग मुंबई से गाडी कर पुणे आये और यहाँ से बहुत ही सकारात्मक ऊर्जा लेकर गए। 

 

आजकल फेसबुक , व्हाट्सप्प पर PD ठीक करने का दावा करने वाले कई  वीडियो वायरल हुए हैं कृपया उनके झांसे में ना आए।  ये लेख लिखने का मेरा उद्देश्य ये ही है।  


Source: Originally published in Marathi on Parkinson’s Mitra

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