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किस्से पार्किंसंस के #७ शोभना ताई

Updated: Apr 8



(Read it in English) (मराठीत वाचा) " कुछ नहीं जी , बस नाटक कर रही है ! परसों ही मैंने उसे बाज़ार में तेज़ तेज़ चलते देखा था , और आज जब मैं उसके घर गयी तो वो कुर्सी से उठने को तैयार नहीं थी।  मुझे तो इसका व्यव्हार अजीब ही लगता है।  आप तो पार्किंसंस के पेशेंट्स के लिए काम करती हैं ना , वो भी पार्किंसंस से पीड़ित है , इस लिए आपसे कह रहीं हूँ। " वास्तव में यह बात बताने में उस पड़ोसन की कोई गलती नहीं थी, ना ही उस पार्किंसंस रोगी की जिसके लिए वह पड़ोसन बोल रहीं थी।

 

पार्किंसंस में कुछ रोगियों को ऑफ और ऑन (Off and On ) पीरियड की तकलीफ होती है।  लेकिन ये हर रोगी को हो ये ज़रूरी नहीं है।  ऑन पीरियड तब होता है जब दवा की गोली अच्छी तरह से अवशोषित हो जाती है , यानि रोगी की हलचल बहुत ही सुलभ हो जाती है। औषदी का असर समाप्त होते ही रोगी की शारीरिक हलचल काफी बाधित हो जाती है।  पीड़ित स्वतः उठ नहीं सकते , कोई शारीरिक कार्यें नहीं कर सकते।  इसी बीच अगर औषधि ले ली जाए तो शारीरिक गतिविधियां फिर से पहले की तरह शुरू हो जाती हैं। 

 

 ये उन बोलने वाली महिला की गलती नहीं थी इस लिए कह रहीं हूँ कि कुछ समय पहले तक मैं खुद भी कुछ पार्किंसन पीड़ितों के लिए ये ही कहती थी।  मेरे पति को ये ऑफ ऑन पीरियड का प्रॉब्लम नहीं था।  जब हमने पीड़ितों के घर जा कर उनसे मिलना शुरू किया उस समय की बात है।  हम श्री केशव महाजन से मिलने गए, उनकी पत्नी अंजली तब नौकरी करती थीं।  अंजली ने हमसे कहा कि घर पहुंचकर महाजन साहेब से बातचीत करना शुरू करें वे स्कूल से आधे दिन की छूटी लेकर आ जाएंगी।  हमारे पहुंचने पर उनकी वृद्ध सास ने दरवाज़ा खोला और हमें अंदर बिठाया।  दस मिनट हो गए , पंद्रह मिनट हो गए लेकिन श्री केशव महाजन बाहर आने का नाम ही नहीं ले रहे थे , हमें ये बात बहुत अजीब लगी।  वृद्ध माताजी से हम कितनी देर और क्या बातें करते , ऊपर से उन्हें सुनाई भी कम पड़ता था।  कुछ समय बाद श्री महाजन बाहर आये, बातों का सिलसिला शुरू हो गया।  कुछ समय में अंजली भी आ गयीं , उस से हमें ऑफ ऑन पीरियड के बारें में बताया।  तब तक हम तो अंदर अंदर चिड़े हुए थे , कि हमें आये हुए इतनी देर हो गयी लेकिन केशवजी बाहर नहीं आये ये कोई तरीका हुआ। 

 

आज हमारे महाजन दम्पति से पारिवारिक रिश्ते हो गए हैं।  जब हम बेलगाव जाते हैं तो वे हमें हक़ से कुंदा लाना का आग्रह करते हैं।  जब उनके पाव भाजी बनती है , तब हमें बुलाने के लिए उनके घर से फ़ोन आता है।  उस समय अगर हमें केशवजी की स्थिति का अंदाजा होता तो हम उनकी सहायता कर सकते थे , और जो गलत फहमी हुई उस से बच सकते थे।  

 

धीरे धीरे हमें समझ में आने लगा कि हर पार्किंसन पीड़ित के लक्षण अलग अलग होते है।  क्या है ना , कि अगर आपके घर में कोई  पार्किंसन पीड़ित है ,तब भी ज़रूरी नहीं कि आप सभी लक्षणों से परिचित हों।  इस दोस्त यानि कि पार्किंसंस के बारे में हम सब कुछ नहीं जानते।  हम  पार्किंसन पीड़ितों के घर जाकर उनसे मिलते हैं इस कारण हमें इसे समझने में सहयता हुई , अलग अलग लक्षणों के बारे में पता चला।  अगर पार्किंसंस पीड़ितों को खुश रहना हैं तो एक दुसरे से बात करते रहें , उनके और अपने लक्षणों के बार में बात करे ये बात समझ में आयी।  मैंने पिछले किस्से पार्किंसंस में "टुगेदर , वी मूव बेटर " ( Together we move better ) के अंतर्गत  बताया था कि विश्व भर के सपोर्ट ग्रुप इन्हीं कारणों से साथ आ रहें हैं। 

 

अगर ऐसा हो तो पीड़ित के रोज़मर्रा के जीवन में अपने परिवार , अड़ोस पड़ोस , मिलने वाले , छोटी उम्र में गर पार्किंसंस हुआ हो तो सहकर्मी, इस तरह के लोगों की ज़रूरत होती हैं।   इस कारण ज़रूरी है कि आप लोगों को बताये कि आपको पार्किंसन है और पार्किंसन के बारे में जानकारी दे।  कई पार्किंसन से पीड़ित अपनी बीमारी लोगों से छुपाते हैं।  ये कतई ना करें।  मैं आगे आने वाले किस्से पार्किंसन के में आपसे इसके बारे में विस्तार में  बात करूंगी।  जब आप पार्किंसन के बारे में लोगों से छिपाते हैं तो इसका अर्थ है कि एक तो आपने खुद इसे स्वीकार नहीं किया और दुसरे कई गलतफहमियां उत्पन्न हो कर रिश्तों में दरार पड़ सकती हैं। 

 

सारांश में कहा जाए तो ऑफ ऑन पीरियड के लक्षणों के चलते कई तकलीफें और गलत फहमियां हो सकती हैं।  ऐसा एक हादसा हमारे साथ हमारे ११ अप्रैल वाले कार्यक्रम में हुआ।  एक पेशेंट को टॉयलेट जाना था।  उनके साथ आये हुए उनके शुभ चिंतक उन्हें ले जाने लगे तब उन्हें चलने में काफी दिक्कत हो रही थी।  एक एक कदम भी वे मुश्किल से बढ़ा पा रहे थे , जिस कारणवश उन्हें टॉइलट पहुँचने में काफी समय लग गया। लेकिन टॉयलेट जाने के लिए उठने से पहले उन्होंने दवाई ले ली थी इस लिए लौटते हुए फुर्ती से चल रहे थे।  वहां उपस्थित २५० -३००  लोगों ने ये देखा।  जब ऐसी कोई घटना आपकी आखों के सामने होती है तब आप इसे समझने लगते हैं।  इस लिए मैं आपसे से अनुरोध करती हूँ कि आप अपने आसपास के लोगों को पार्किंसन के बारे में ज़रूर बताएं।  इससे आपके दैनिक जीवन में आपको सुविधा होगी।  अक्सर आपके घरवालों को भी इस बारें में पता नहीं होता , आप उनसे ये बातें साजा करें।  

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