Quantcast
top of page

पार्किंसंस के भावनात्मक एवं मनोवैज्ञानिक प्रभाव

Updated: Jan 26


(Read in English) PD का निदान होना,किसी भी व्यक्ति के लिए बेहद ही तनावपूर्ण होता है (पढ़िए पार्किंसंस की मूल बाते)। निदान को स्वीकारने के बाद का सफर PD से पीड़ित के परिवार वालों के लिए भी बहुत लम्बा होता है। ये सफर कई चुनौतियों , सीखों और बीमारी की प्रगति के इर्द गिर्द घूमता है। पूरा जीवन इस बीमारी के असर को व्यवस्थित करने लग जाता है । इसमें ना सिर्फ पार्किंसंस से पीड़ित व्यक्ति बल्कि पुरे परिवार और शुभचिंतकों पर असर पड़ता है।


PD के शारारिक असर के बारे में तो वैसे काफी जानकारी उपलब्ध है, इस विषय में हमारा लेख भी है। इसके शारारिक इलाज में औषधियां , फिजियोथेरेपी , व्यायाम आदि है। (पढ़िए पार्किंसंस से पीड़ितों के लिए व्यायाम के फायदे)

परिवार पर इसका असर पड़ता है , कम तो कहीं ज्यादा लेकिन हाँ असर तो पड़ता ह

इस बीमारी के कारण पीड़ित एवं उसके परिवार पर मानसिक एवं मनोवैज्ञानिक प्रभाव पड़ता ही है। जब कोई व्यक्ति, पार्किंसंस से पीड़ित परिवारजन के संपर्क में आता है तो पार्किंसंस के कारण परिवार में आये हुए बदलाव के विषय में ज़रूर बात होती है। पीड़ित का परिवार अक्सर "पार्किंसंस के कारण मेरा भाई/ बहन /जीवन साथी / मात पिता बदल गए है " ये सुनने की संभावना बहुत है। ये बदलाव कहीं सूक्ष्म तो कहीं अधिक होते है , पर हाँ होते ज़रूर हैं। पीड़ित को लगता है की उसके परिवार वाले बदल गए है। परिवार वालों को लगता की पीड़ित बदल गया है। पूरा परिवार अपने व्यवहार में कई बदलाव महसूस करता है , लेकिन पीड़ित व्यक्ति लोगों के बदले हुए व्यव्हार को कुछ ज्यादा ही महसूस करता है।


क्या ये सामान्य है ?

PD हमारे मस्तिष्क पर प्रभाव डालता है और हमारा व्यक्तित्व हमारी मानसिक सोच पर निर्भर करता है। इसलिए ये तर्कसंगत है कि मस्तिष्क में प्रतिवर्तन , व्यक्तित्व को प्रभावित करेगा। उसपर शारारिक चुनौतियां , भविष्य को लेकर अनिश्चितता , सामाजिक कठनाइयां और आर्थिक भार - मानसिक स्थिति को प्रभावित करने में एक बड़ी भूमिका निभाते है। इस मानसिक स्थिति का प्रभाव PD से पीड़ित एवं शुभचिंतक दोनों पर पड़ता है। इस मानसिक तकलीफ का निदान और देखभाल, शारारिक तकलीफों की तुलना बहुत ही कम लिखा और समझा गया है। ये इस वजह से भी हो सकता है की इसके लक्षण नज़र स्पष्ट रूप से नज़र नहीं आते , ये चुप चाप दिमागी तौर पर चलता है। ये कई बार ध्यान में नहीं आता और ध्यान आने पर भी बढ़ती उम्र का असर समझकर इसे नज़रअंदाज़ कर दिया जाता है। लेकिन ये देखते हुए कि ये PD से जुड़ा हुआ मुद्दा है इसका इलाज करना बहुत आवश्यक है।


इसके प्रभाव क्या हो सकते है ? डॉक्टर द्वारा देखे गए सामान्य मानसिक स्वास्थ्य समस्याएँ आगे बताई गयी है। ये समस्या हर व्यक्ति के लिए अलग होती है और कई बार तो एक ही व्यक्ति पर इन मानसिक समस्याओं का असर पार्किंसंस की प्रगति के हिसाब से बढ़ता है।

घबराहट : ये बारम्बार होने वाली चिंता , व्यग्रता , उत्कंठा के रूप में सामने आती है।

अवसाद : ये क्रोध , बदलती मनोदशा और लोगों से जी चुराने के रूप में नज़र आती है।

उत्तेजना : बाहर जाना , लोगों से मिलना , कोई कार्य करना यहाँ तक की रोज़मर्रा के कामों में भी मन ना लगना

उदासीनता : सबसे अलग थलग रहना

अनुभूति में बदलाव : कोई भी जानकारी (पढ़ने, बातचीत , देखने आदि ) में धीमापन आना। ध्यान ना लगना और आगे चलकर जो चीजें नहीं हो उनका दिखना (Hallucination) में परिवर्तित हो सकता है।

यादाश्त सम्बंधित समास्यें : आगे चलकर ये मनोभ्रम में बदल सकती है।


परिवार वाले अक्सर पार्किंसंस से पीड़ित रोगियों के बारे में जिद्दी , अव्यवस्थित , अनुशासनहीन आदि जैसे शब्दों का प्रयोग करते है।


Image Source : www.vecteezy.com

13 views0 comments

Recent Posts

See All

Commentaires


bottom of page